हा र मो नि य म
09 जून, 2012
मार्क्सवाद के पावन पथ पर...
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दुनिया बड़ी है, आबादी ज्यादा। हर दिन लोग मर रहे हैं। उनके लिए शोकगीत लिखे जा रहे हैं, संस्मरण छप रहे हैं और संस्थाएं बन रही हैं। ऐसे में ...
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26 फ़रवरी, 2012
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18 फ़रवरी, 2012
अच्छा बच्चाः उन दिनों की चीन्हाखचाई
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तोतेः शरारती लड़के खदेड़े गए कौएः कामकाजी और दुनियादार मैनाः अंधेरा देख घर की तरफ भागती देहातिन गौरेयाः भेली खाते कुदकती कोई लड़की वे ट...
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11 फ़रवरी, 2012
मिस लिन्डा मार्निंग शोः उन्हीं दिनों की चीन्हाखचाई
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भारी जबड़े वाली एक सांवली बुढ़ाती लड़की को तीन चार आदमी रह-रह कर आंटे की तरह गूंदने लगते थे वह आनंद में विभोर जब लेती थी स...
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09 फ़रवरी, 2012
ओ घरघुसनेः उन्हीं दिनों की चीन्हाखचाई
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ओ घरघुसने बाहर निकल पान की दुकान तक बेमकसद यूं ही चल। कबाड़ी की साइकिल की तीलियों पर टूटते सूर्य को देख ओ चिन्ताग्रस्त एक्जीक्यूटिव इंडिया क...
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