सफरनामा

08 जुलाई, 2008


2 टिप्‍पणियां:

  1. हम भी उल्टी खोपड़ी के आदमी हैं, आपको उल्टी तरफ़ से पढ़ रहे हैं, दुर्गा मुर्गा पर कमेंट पहिले छोड़ आए,दुर्गा दा से परिचय अब पाए. बंधु समय निकालिए...थोड़ा जल्दी जल्दी लिखा करिए..

    सॉरी आपको देने के लिए पइसा नहीं है लेकिन फरमाइश तो कर ही सकते हैं, है कि नहीं?

    मुझे तो ऐसा लगता है कि ब्लॉग पसंद आने पर कमेंट देने के बदले अगर लोग दस-बीस रुपया दे दें तो कुछ बेहतर रहेगा, आप क्या कहते हैं?

    ऐं? लोग बिलाग पढ़ना बंद कर देंगे? जाइए फिर रहने दीजिए, हम आपकी पढ़ लेंगे, आप हमारी.

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  2. रा्अजेनाशमदास प्यारे कांत्रेक्तोर इमोशनोविच प्रियोदोरशोव,
    कहां भादो और कबाड़ से भरे लंदनी कुंए में गुलाटियां खाते मुग्ध हो रहे हो। मेरे प्यारे बाहर निकलो देखो कोसी में बाढ़ है बीबीसी कह रहा है कि तीन सौ साल में कोसी इतनी निर्मम कभी नही हुई। आओ न यहां ज्यादा पानी है और दूसरे लोग भी हैं।
    कभी यूं ही कबाड़खाने की तरफ टहलते आओ। वहां हारमोनियम के साथ एक एक दम नया डिसेक्शन बाक्स आया है। चमाचम। देखो न प्यारे विज्ञान ने कितनी तरक्की कर ली है। वहां टेस्टटूप भी है और पैर की लंबाई बताने वाला वर्नियर कैलीपर्स भी। स्कालपेल, चिमटी वाला यह बक्सा एक सुकोमल सा लड़का यूं ही हाईस्कूल के प्रैक्टिकल के अगले दिन दे गया। कहता था कि विग्यान ने मानवता का विनाश कर डाला है वह अब आर्ट साइट जाएगा।

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