सफरनामा
26 फ़रवरी, 2012
18 फ़रवरी, 2012
अच्छा बच्चाः उन दिनों की चीन्हाखचाई
तोतेः शरारती लड़के खदेड़े गए
कौएः कामकाजी और दुनियादार
मैनाः अंधेरा देख घर की तरफ भागती देहातिन
गौरेयाः भेली खाते कुदकती कोई लड़की
वे ट्रैफिक में रेंगते, तनावग्रस्त
बेडरूमों में पसरे तुंदियलों के देख क्या सोचते होंगे
यही न, मरें साले ये इसी लायक हैं।
सच मानो
मैं चिड़ियों की नजर में अच्छा बनने की कोशिश नहीं कर रहा हूं।
कौएः कामकाजी और दुनियादार
मैनाः अंधेरा देख घर की तरफ भागती देहातिन
गौरेयाः भेली खाते कुदकती कोई लड़की
वे ट्रैफिक में रेंगते, तनावग्रस्त
बेडरूमों में पसरे तुंदियलों के देख क्या सोचते होंगे
यही न, मरें साले ये इसी लायक हैं।
सच मानो
मैं चिड़ियों की नजर में अच्छा बनने की कोशिश नहीं कर रहा हूं।
11 फ़रवरी, 2012
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